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आम करेगा मालामाल: पेड़ों पर आया बौर दे रहा संकेत, इस बार होगी बंपर फसल

ऊना। इस बार आम की फसल के बंपर होने की उम्मीद है। आम के पेड़ों पर आया बौर इसी ओर इशारा कर रहा है कि इस बार बागवानों को फसल मालामाल करने वाली है। हालांकि अभी भी मौसम पर काफी कुछ निर्भर करेगा। यदि ओलावृष्टि और आंधी से बचाव रहा तो आम की फसल बागवानों को मालामाल करने के साथ मैंगो लवर्स के लिए भी कई सौगातें लेकर आएगी। गौरतलब है कि वर्ष 2021 में आम की फसल का ऑफ़ सीज़न रहा था। संभवत इस बार सीजन के ऑन होने की संभावनाएं पहले ही जता दी गई थी।

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जिला ऊना में आम के पेड़ों पर आया इस बार का बौर अच्छी फसल के संकेत दे रहा है। जिसे देखते हुए एक तरफ जहां किसानों और बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। वहीं दूसरी ओर बंपर फसल की उम्मीदें भी जताई जा रही हैं। जिला ऊना की बात की जाये तो मैदानी इलाका होने के चलते जहां आम की बड़े स्तर पर खेती होती है और जिला ऊना में लगने वाले आम की पंजाब में काफी मांग रहती है। जिला में करीब 2200 से 2300 हेक्टेयर भूमि पर आम की फसल की पैदावार होती है। जिला ऊना में आम की प्रमुख किस्मों में दशहरी, लंगड़ा, मल्लिका, आम्रपाली और देसी आम की पैदावार प्रमुख रहती है। वही देसी आम का प्रयोग अचार के रूप में ज्यादातर किया जाता है। आम के शौकीनों का कहना है कि जिस तरह पेड़ों पर बौर आया है, उसी से संभावना है कि इस बार आम की फसल बंपर होगी। इससे एक और जहां आम की खेती करने वालों को फायदा होगा वहीं इस बार आम के दाम भी पिछले साल की अपेक्षा काफी कम रहने की उम्मीद है।

इसके साथ ही लोगों ने मौसम के सकारात्मक बने रहने की भी उम्मीद जताई है। दरअसल हर साल गर्मियों के शुरुआत में आने वाली आंधी और बारिश आम की फसल को नुकसान पहुंचाती आई है, ऐसे में यदि इस बार भी कुछ ऐसा होता है तो आम की फसल के उत्पादन को असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ अशोक धीमान की माने तो आम के पेड़ों पर हुई फ्लावरिंग काफी अच्छी दिख रही है। उनका कहना है कि इस बार आम की फसल का उत्पादन करीब 18 हजार मीट्रिक टन होने की उम्मीद है, यदि मौसम की मार भी पड़ती है तब भी कोई ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं इसके बावजूद करीब 17000 मीट्रिक टन उत्पादन होने की संभावना बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आम की फसल के सीजन में मैंगो हॉपर नाम के कीट की काफी दिक्कत आती है जिससे बागवानी विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार पेड़ों पर दवाई छिड़काव करते हुए इस कीट से छुटकारा पाया जा सकता हैं।

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