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बुधवार काे दुर्गा अष्टमी, कर्फ्यू में घर बैठकर पूजा कैसे करे कि रहीं पंडितों के पास क्वेरी

चंडीगढ़(नीना शर्मा).शहर में काेराेना वायरस के कर्फ्यू के चलते इस बार माता के भक्ताें काे मंदिराें में अष्टमी पूजन करना मुश्किल हाेगा। इसलिए भक्ताें ने अष्टमी के दिन किस तरह से कन्या पूजन हाेना चाहिए जानने के लिए पंडिताें काे काॅल करना शुरू कर दिया है।

लाेगाें का कहना है कि न ताे शहर में मंदिर खुले हुए हैं और न ही मार्केट में कन्या पूजन का सामान लाेगाें काे मिल पाएगा। दूसरी तरफ जहां पर काेराेना वायरस से बचने के लिए बार-बार साेशल डिस्टेंसिंग की बात कर रहे हैं, अपने घर में लाॅकडाउन रहने की बात कर रहे हैं, घर से न निकलें के मैसेज दिए जा रहे हैं।

ऐसे में आपके घर में कंजक न ताे आएगी और न ही आप मंदिर में जाकर कन्या पूजन कर सकेंगे। ऐसे में पंडिताें और ज्याेतिषियाें की चैत्र नवरात्रे में किस तरह से दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन करना चाहिए लाेगाें द्वारा फाेन पर पूछा जा रहा है।

राेजाना आरही हैं 50 से अधिक काॅल्स
लक्ष्मी नारायण मंदिर सेक्टर 20 के पंडित रघुवंश झा ने बताया कि लाॅक डाउन के दाैरान घर में लाेग राेजाना कन्या पूजन कैसे करें इसकी राय लेने के लिए काॅल्स कर रहे हैं। सुबह से शाम तक लाेगाें की लगभग 50 से अधिक काॅल्स आरही हैं। झा ने बताया कि लाेगाें काे बताया जा रहा है कि जब शहर में एेसी परिस्थिति है जिसमें घर से निकलना मना है, ऐसे में दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह घर पर ही माता रानी की फाेटाे के आगे 9 कंजकाें के लिए दक्षिणा, यानि कि 10-10 के 9 नाेट रखें, उन पर फूल चढ़ाएं, सिंदूर से टीका लगाएं, माैली रखें, उसके बाद पूजा अर्चना करके,इन्हें अलग अलग लिफाफे में या फिर अगर अापके पास लाल चुनरी है उसमें रख दें। जैसे ही शहर में वायरस की परिस्थिती सही हाे जाए तब ये दक्षिणा कंजकाें काे देकर, उनके पैर छूएं और आशिर्वाद लें।

जिस घर में बेटी है वहां काेई परेशानी नहीं

प्राचीन खेड़ा शिव मंदिर सेक्टर-28 के पंडित ईश्वर चंद्र शास्त्री ने कहा कि लाेगाें काे फाेन पर यही बताया जा रहा है कि अगर आपके घर में अगर 9 साल से कम उम्र की कन्या है ताे आपकाे किसी तरह भी परेशान नहीं हाेना चाहिए। उसकाे सामने बैठा कर उसका पूजन करें, तिलक लगाएं, माैली बांधे, अारती उतारें अाैर उसकाे भाेग लगाकर उसका आशिर्वाद लें। शास्त्री का कहना है कि जैसी परिस्थिति है उसी के मुताबिक ही अष्टमी पूजन करें, जहां कन्या नहीं है वहां माता की फाेटाे सामने रखकर माता का पूजन करें।



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